जागृत भारत | दिल्ली में हुए धमाके ने मेरठ के एक परिवार की खुशियां छीन लीं। ब्लास्ट में मेरठ के न्यू इस्लामनगर निवासी 32 वर्षीय मोहसिन की मौत हो गई। हादसे की सूचना मिलते ही उनके भाई नदीम दिल्ली पहुंचे और शव को लेकर मेरठ लौट आए। लेकिन जैसे ही मोहसिन की पत्नी सुल्ताना को इस बात की जानकारी हुई, वह मेरठ पहुंची और पति का अंतिम संस्कार दिल्ली में ही करने की जिद पर अड़ गई। इसके चलते परिवार में घंटों तक हंगामा होता रहा।
आख़िरकार समझौते के बाद मोहसिन के शव को दिल्ली ले जाकर दफनाया गया।
ब्लास्ट में गई मोहसिन की जान
मोहसिन दो साल पहले रोज़गार की तलाश में मेरठ से दिल्ली गए थे। वहां वह जामा मस्जिद के पास ई-रिक्शा चलाकर परिवार का पालन-पोषण करते थे। सोमवार शाम वह लाल किला की ओर सवारियां लेकर निकले थे, तभी ब्लास्ट की चपेट में आने से उनकी मौके पर ही मौत हो गई।
मोहसिन के परिवार में पत्नी सुल्ताना, 10 वर्षीय बेटी हिफजा और 8 वर्षीय बेटा आहद हैं।
परिवार में मचा कोहराम
मंगलवार सुबह जब शव मेरठ पहुंचा तो मोहसिन की मां संजीदा और परिवार के अन्य सदस्यों का रो-रोकर बुरा हाल था।
संजीदा ने बताया, “मैंने बेटे को दिल्ली जाने से मना किया था, लेकिन वह बच्चों के भविष्य के लिए वहां चला गया। उसका सपना था कि बच्चे पढ़-लिखकर बड़े आदमी बनें।”
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मेरठ में छह घंटे चला हंगामा
मेरठ पहुंचने के बाद मोहसिन की पत्नी सुल्ताना ने कहा कि वह पति का अंतिम संस्कार दिल्ली में ही करेंगी। इस पर सास संजीदा और देवर नदीम के बीच विवाद हो गया।
सास ने बहू के पैर पकड़कर विनती की कि “बेटे को यहीं दफना दो,” लेकिन सुल्ताना ने भी सास के पैर पकड़कर कहा, “मैं उसे दिल्ली ही ले जाऊंगी।”
करीब छह घंटे बाद परिवार में सहमति बनी और शव दिल्ली ले जाया गया।
पत्नी का दर्द
सुल्ताना ने कहा, “सोमवार दोपहर 1 बजे मोहसिन काम पर निकले थे। शाम 6 बजे आखिरी बार बात हुई थी, बोले जाम में फंसे हैं। इसके बाद फोन नहीं उठाया। रात भर कॉल करती रही, सुबह पता चला कि वो नहीं रहे।”
रिश्तेदारों का आरोप
मोहसिन के रिश्तेदार मोहम्मद यूसुफ ने आरोप लगाया कि सुल्ताना पैसों के लालच में शव को दिल्ली ले गई। उन्होंने कहा, “पूरा परिवार चाहता था कि मोहसिन का अंतिम संस्कार मेरठ में हो, लेकिन वह नहीं मानी। मोहसिन के माता-पिता की हालत बहुत खराब है।”
मोहसिन की कहानी
मोहसिन 9 भाई-बहनों में दूसरे नंबर पर थे। वे हर दिन मेहनत कर 500-600 रुपए कमा कर परिवार का खर्च चलाते थे। अब उनकी मौत ने पूरे परिवार को तोड़ दिया है।
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