जागृत भारत | रामपुर(Rampur): दिवंगत सपा नेता अमर सिंह के परिवार पर कथित आपत्तिजनक टिप्पणी मामले में समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय महासचिव मोहम्मद आजम खां को बड़ी राहत मिली है। एमपी–एमएलए विशेष न्यायालय ने बुधवार को सबूतों के अभाव में उन्हें सभी आरोपों से बरी कर दिया। कोर्ट ने तय तारीख 28 नवंबर को उन्हें व्यक्तिगत रूप से उपस्थित होने का आदेश दिया था, जिसके बाद आजम खां वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए सुनवाई में शामिल हुए।
2018 के इंटरव्यू से शुरू हुआ विवाद
यह मामला 23 अगस्त 2018 से जुड़ा है, जब आजम खां ने जौहर यूनिवर्सिटी में एक निजी टीवी चैनल को इंटरव्यू दिया था। इस दौरान उन्होंने अमर सिंह की बेटियों को लेकर विवादित टिप्पणी की थी। इसके बाद अमर सिंह ने इस मुद्दे को बड़े स्तर पर उठाया, नोएडा से लखनऊ तक रैली निकाली और डीजीपी के निर्देश पर लखनऊ में उनके खिलाफ एफआईआर दर्ज कराई गई। बाद में केस को स्थानांतरित कर रामपुर की अजीमनगर पुलिस को सौंपा गया, जहां पुलिस ने जांच पूरी कर आरोप पत्र दाखिल कर दिया। मामले की सुनवाई एमपी–एमएलए अदालत में चल रही थी।
अंतिम बहस के बाद कोर्ट ने सुनाया फैसला
मंगलवार को मामले में अंतिम बहस पूरी हुई थी। इसके बाद कोर्ट ने 28 नवंबर को फैसला सुनाने की तिथि तय की और आजम खां को व्यक्तिगत रूप से पेश होने का आदेश दिया। बुधवार को उन्होंने जेल से ही वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए अदालत से जुड़कर अपनी उपस्थिति दर्ज कराई।
कैदी वाहन को लेकर जेल में हड़कंप
पेशी वाले दिन कोर्ट ले जाने के लिए जेल प्रशासन ने बड़ा कैदी वाहन तैयार किया था। लेकिन वाहन देखते ही आजम खां ने उसमें बैठने से साफ इनकार कर दिया। उन्होंने कहा कि वे “राजनीतिक कैदी” हैं और बड़े कैदी वाहन में नहीं जाएंगे। उन्होंने अपने लिए बोलेरो जैसे छोटे वाहन की मांग की और वैन में बैठने से इनकार करते हुए वापस जेल लौट गए। इसके बाद अधिकारियों में अफरा-तफरी मच गई। जेल प्रशासन को उनके लिए छोटा वाहन उपलब्ध कराने की प्रक्रिया शुरू करनी पड़ी।
वीसी के जरिए पेश हुए और हुए बरी
अंततः प्रशासन ने वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग से पेशी सुनिश्चित की। अदालत से जुड़े कुछ ही मिनटों में कोर्ट ने निर्णय पढ़कर सुनाया और आजम खां को सबूतों के अभाव में बरी घोषित कर दिया। इस फैसले को आजम खां और उनके समर्थकों ने बड़ी राहत के रूप में देखा है।
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