जागृत भारत | बरेली( Bareilly) : जिले के सिटी मजिस्ट्रेट अलंकार अग्निहोत्री ने सरकारी आवास छोड़ दिया है। उन्होंने दावा किया कि उन्हें भय और असुरक्षा का माहौल महसूस हो रहा है, जिसके चलते उन्हें मजबूरी में आवास छोड़ना पड़ा। उन्होंने कहा कि बरेली के लोगों का प्यार हमेशा उनके साथ रहेगा और आवास आते-जाते रहते हैं, लेकिन मौजूदा परिस्थितियों में यहां रहना सुरक्षित नहीं लगा।
अलंकार अग्निहोत्री ने जिलाधिकारी (डीएम) पर गंभीर आरोप दोहराते हुए कहा कि उन्हें डीएम आवास पर बंधक बनाए जाने जैसी स्थिति का सामना करना पड़ा। उन्होंने सवाल उठाया कि वह कौन व्यक्ति था जिसने जिलाधिकारी से फोन पर उनके लिए अपशब्द कहे और रातभर बंधक रखने की बात कही। उन्होंने कहा कि इस सवाल का जवाब डीएम को देना चाहिए।
इस्तीफा मंजूर नहीं, हाईकोर्ट जाने की चेतावनी
सिटी मजिस्ट्रेट पद से दिए गए इस्तीफे के बारे में अलंकार अग्निहोत्री ने कहा कि अभी उनका इस्तीफा स्वीकार नहीं किया गया है। उन्होंने स्पष्ट किया कि यदि जरूरत पड़ी तो वह इस मामले को लेकर हाईकोर्ट जाएंगे। उन्होंने कहा कि न्यायालय जाना उनका संवैधानिक अधिकार है और वह अपने अधिकारों के लिए कानूनी लड़ाई लड़ेंगे।
संघर्षों से भरा रहा अलंकार अग्निहोत्री का जीवन
पीसीएस अधिकारी अलंकार अग्निहोत्री का जीवन संघर्षों से भरा रहा है। महज साढ़े दस साल की उम्र में उनके पिता का निधन हो गया था, जिसके बाद परिवार की जिम्मेदारी उनके कंधों पर आ गई। उनकी मां गीता अग्निहोत्री ने कठिन परिस्थितियों के बावजूद उनकी पढ़ाई और परवरिश में कोई कमी नहीं आने दी।
उन्होंने कानपुर से 12वीं तक की पढ़ाई की और यूपी बोर्ड की इंटरमीडिएट परीक्षा में प्रदेश में 21वां स्थान हासिल किया। इसके बाद उन्होंने आईआईटी-बीएचयू से मेटलर्जिकल इंजीनियरिंग में बी-टेक किया और आईटी सेक्टर में कंसल्टेंट के रूप में करीब 10 वर्षों तक नौकरी की।
पहले प्रयास में यूपीपीसीएस पास कर बने डिप्टी कलेक्टर
परिवार की जिम्मेदारियों के पूरा होने के बाद वर्ष 2014 में उन्होंने निजी नौकरी छोड़कर यूपीपीसीएस की तैयारी शुरू की। कड़ी मेहनत के बाद उन्होंने पहले ही प्रयास में यूपीपीसीएस परीक्षा उत्तीर्ण कर ली और डिप्टी कलेक्टर बने। यूपीपीसीएस परीक्षा में उन्होंने 15वीं रैंक प्राप्त की थी।
अलंकार अग्निहोत्री अपनी सफलता का श्रेय अपनी मां और पत्नी आस्था मिश्रा को देते हैं। उन्होंने बताया था कि तैयारी के दौरान उन्होंने एक साल की सैलरी बचाकर रखी थी, ताकि अगले 2-3 साल तक परिवार को आर्थिक परेशानी न हो।
विवाद के बीच प्रशासनिक हलकों में हलचल
सिटी मजिस्ट्रेट द्वारा लगाए गए आरोपों और आवास छोड़ने की घटना के बाद प्रशासनिक और राजनीतिक हलकों में हलचल तेज हो गई है। मामले को लेकर आगे कानूनी लड़ाई की संभावना जताई जा रही है और हाईकोर्ट में याचिका दायर होने पर स्थिति और स्पष्ट होगी।
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