जागृत भारत | आगरा(Agra): जिले में झोलाछाप के गलत और लापरवाह इलाज ने एक नवजात शिशु की जान को गंभीर खतरे में डाल दिया। फोड़ा बताकर नाभि में चीरा लगाने के बाद नवजात की आंतें पेट से बाहर निकल आईं। हालत बिगड़ने पर बच्चे को निजी अस्पताल में भर्ती कराना पड़ा, जहां अब तक 10 दिनों से उसका इलाज चल रहा है। सर्जरी के बाद भी शिशु पूरी तरह स्वस्थ नहीं है और इलाज पर ढाई लाख रुपये से अधिक खर्च हो चुका है।
नाभि की सूजन को फोड़ा बताकर लगा दिया चीरा
कटरा वजीर खां निवासी नीतेश ने बताया कि वह जयपुर में इलेक्ट्रॉनिक कांटे बेचने का काम करते हैं, जबकि उनका परिवार आगरा में रहता है। उनकी पत्नी रानी ने 23 नवंबर को एक निजी अस्पताल में बेटे को जन्म दिया था। कुछ दिन बाद नवजात की नाभि लाल पड़ने लगी और उसमें सूजन आ गई।
10 जनवरी की शाम को नीतेश ने घर के पास दुकान चलाने वाले झोलाछाप राकेश को बच्चे को दिखाया। झोलाछाप ने नाभि की सूजन को फोड़ा बताकर बिना किसी जांच के चीरा लगा दिया और कुछ दवाएं देकर भेज दिया।
चीरा लगते ही बाहर आने लगी आंतें
चीरा लगाने के कुछ ही देर बाद नवजात की नाभि से आंत बाहर निकल आई। रात भर में स्थिति और बिगड़ती चली गई और सुबह तक आंत का बड़ा हिस्सा पेट से बाहर आ गया। यह देखकर परिजन घबरा गए और तुरंत बच्चे को एसएन मेडिकल कॉलेज लेकर पहुंचे। डॉक्टरों ने हालत गंभीर बताते हुए नवजात को पुष्पांजलि हॉस्पिटल रेफर कर दिया, जहां उसे तत्काल भर्ती कर सर्जरी की तैयारी की गई।
नाभि का हर्निया था, झोलाछाप ने बढ़ा दिया खतरा
पुष्पांजलि हॉस्पिटल के पीडियाट्रिक सर्जन डॉ. राहुल देव शर्मा ने बताया कि नवजात को गंभीर अवस्था में लाया गया था। जांच में पता चला कि बच्चे को नाभि का हर्निया था। नाभि के पास मौजूद झिल्ली कमजोर होने के कारण वहां लालिमा और सूजन थी। डॉ. शर्मा के अनुसार झोलाछाप द्वारा लगाए गए चीरे से आंतें कट गईं, जिससे पेट में गंभीर संक्रमण फैलने का खतरा पैदा हो गया था।
सर्जरी कर काटना पड़ा आंत का क्षतिग्रस्त हिस्सा
डॉक्टरों ने तुरंत सर्जरी कर नवजात की जान बचाने की कोशिश की। सर्जरी के दौरान आंत का वह हिस्सा काटकर अलग किया गया, जिसमें सड़न और क्षति हो चुकी थी। इसके बाद आंत को जोड़ा गया।
फिलहाल पेट के रास्ते मल निकास के लिए एक कृत्रिम रास्ता बनाया गया है। डॉक्टरों का कहना है कि बच्चा अब दूध पी रहा है और उसका वजन भी धीरे-धीरे बढ़ रहा है।
डिस्चार्ज के बाद फिर बिगड़ी हालत
नीतेश ने बताया कि बच्चे को शुक्रवार को अस्पताल से डिस्चार्ज कर दिया गया था, लेकिन घर ले जाने के बाद फिर से समस्या शुरू हो गई। इसके बाद नवजात को दोबारा अस्पताल में भर्ती कराना पड़ा। फिलहाल बच्चा अभी भी अस्पताल में भर्ती है।
इलाज में खर्च हो चुके ढाई लाख से ज्यादा
परिजनों के अनुसार अब तक इलाज, सर्जरी और दवाओं पर करीब ढाई लाख रुपये से अधिक खर्च हो चुके हैं। आर्थिक स्थिति पर भी इसका भारी असर पड़ा है, लेकिन बच्चे की जान बचाना सबसे बड़ी प्राथमिकता है।
सीएमओ ने दिया कार्रवाई का आश्वासन
मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ. अरुण श्रीवास्तव ने कहा कि यह मामला बेहद गंभीर है। झोलाछाप द्वारा नवजात के इलाज में की गई लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी। पूरे मामले की जांच के लिए टीम भेजी जाएगी और दोषी पाए जाने पर कड़ी कार्रवाई की जाएगी।
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