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उत्तर प्रदेश में ट्रेन की देरी से छूटी NEET की परीक्षा, रेलवे पर 9 लाख रुपये जुर्माना, छात्रा को मिलेगा मुआवजा

Published on: January 26, 2026
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जागृत भारत | बस्ती(Basti): उत्तर प्रदेश के बस्ती जिले में एक छात्रा की महत्वपूर्ण परीक्षा ट्रेन की देरी के कारण छूट गई, जिसके बाद मामला उपभोक्ता आयोग तक पहुंचा। आयोग ने रेलवे की लापरवाही को गंभीर मानते हुए उस पर भारी जुर्माना लगाया है।

बस्ती जिला उपभोक्ता आयोग के अध्यक्ष न्यायाधीश अमरजीत वर्मा और सदस्य अजय प्रकाश सिंह ने रेलवे पर 9 लाख रुपये से अधिक का मुआवजा लगाने का आदेश दिया। आयोग ने कहा कि ट्रेन की देरी के कारण छात्रा को मानसिक, शैक्षणिक और आर्थिक नुकसान हुआ है, जिसके लिए रेलवे जिम्मेदार है।

छात्रा ने परीक्षा देने के लिए लिया था इंटरसिटी ट्रेन

स्थानीय गांधीनगर पिकौरा बख्श मोहल्ला निवासी छात्रा समृद्धि सिंह ने 7 मई 2018 को लखनऊ के जयनारायण पीजी कॉलेज में आयोजित परीक्षा देने के लिए बस्ती से इंटरसिटी सुपरफास्ट ट्रेन का टिकट खरीदा था। टिकट का किराया 190 रुपये था। उन्हें परीक्षा केंद्र पर दोपहर 12:30 बजे रिपोर्ट करना था, जबकि ट्रेन का निर्धारित समय चारबाग स्टेशन पर सुबह 11:00 बजे पहुंचने का था।

ट्रेन तय समय से काफी देर से पहुंची

हालांकि ट्रेन निर्धारित समय पर नहीं पहुंची और करीब 1:34 बजे दोपहर चारबाग स्टेशन पहुंची। इस देरी के कारण छात्रा परीक्षा केंद्र पर समय पर नहीं पहुंच पाई और उनकी परीक्षा छूट गई। छात्रा का कहना था कि इस वजह से उनका एक साल बर्बाद हो गया और उन्हें मानसिक तनाव का सामना करना पड़ा।

रेलवे को भेजा गया नोटिस, नहीं मिला जवाब

छात्रा ने रेलवे मंत्रालय, महाप्रबंधक रेलवे और स्टेशन अधीक्षक को नोटिस भेजा, लेकिन किसी भी अधिकारी ने कोई जवाब नहीं दिया। इसके बाद उन्होंने 11 सितंबर 2018 को उपभोक्ता आयोग में मुकदमा दायर किया।

7 साल तक चला मामला

यह मामला सात वर्ष से अधिक समय तक चला। सुनवाई के दौरान रेलवे ने ट्रेन के विलंब को स्वीकार किया, लेकिन देरी का कोई स्पष्ट कारण नहीं बता सका।

रेलवे को 45 दिन में भुगतान का आदेश

आयोग ने रेलवे को आदेश दिया कि वह 45 दिन के भीतर कुल 9,10,000 रुपये का भुगतान करे। इसमें मुआवजा राशि के साथ अन्य मद में 10 हजार रुपये भी शामिल हैं। यदि रेलवे तय समय में भुगतान नहीं करता है, तो उसे 12 प्रतिशत वार्षिक ब्याज भी देना होगा।

देशभर में ट्रेन देरी पर बढ़ रही नाराजगी

यह मामला देशभर में ट्रेन समय पर न पहुंचने की समस्या को उजागर करता है। अक्सर यात्रियों को देरी का सामना करना पड़ता है, लेकिन बहुत कम लोग इसके खिलाफ कानूनी कदम उठाते हैं। इस फैसले को यात्रियों के अधिकारों की दिशा में एक अहम कदम माना जा रहा है।

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