जागृत भारत | गोरखपुर(Gorakhpur): सोशल मीडिया पर सुसाइड से जुड़ा एक वीडियो पोस्ट करने से गोरखपुर में हड़कंप मच गया। वीडियो में एक युवती हाथ में गोली लेकर उसे खाते हुए नजर आ रही थी। बैकग्राउंड में दर्द भरा सैड सॉन्ग चल रहा था और चेहरे को इमोजी से छिपाया गया था। वीडियो पर लिखा था—
“अगर मैं मर जाऊं तो कोई ये मत कहना कि क्यों मरी हूं… वैसे सोच लेना कि किस वजह से मरी हूं।”
वीडियो सामने आते ही मेटा (फेसबुक-इंस्टाग्राम की पैरेंट कंपनी) के AI सिस्टम ने इसे आत्महत्या से जुड़ा हाई रिस्क कंटेंट मानते हुए उत्तर प्रदेश पुलिस कंट्रोल रूम को अलर्ट भेज दिया। इसके बाद गोरखपुर पुलिस हरकत में आई और युवती की लोकेशन ट्रेस कर गुलरिहा थाना पुलिस मौके पर पहुंची।
युवती सुरक्षित मिली, जहर नहीं थी गोली
पुलिस जब युवती के कमरे में पहुंची तो वह पूरी तरह सुरक्षित मिली। पूछताछ में सामने आया कि वीडियो सुसाइड का नहीं बल्कि दोस्तों के साथ किया गया एक प्रैंक था। युवती ने बताया कि जिस गोली को उसने वीडियो में खाया था, वह कोई जहर नहीं बल्कि मेंटोश की गोली थी।
युवती ने पुलिस से माफी मांगते हुए कहा कि उसका किसी को डराने या गलत संदेश फैलाने का इरादा नहीं था। गुलरिहा पुलिस ने वीडियो तुरंत डिलीट करवाया और सख्त चेतावनी देकर उसे छोड़ दिया। युवती ने भविष्य में ऐसी गलती दोबारा न करने का आश्वासन भी दिया।
बिहार की रहने वाली है युवती, गोरखपुर में करती है काम
पुलिस के अनुसार युवती मूल रूप से बिहार के गोपालगंज जिले की रहने वाली है। वह गोरखपुर के गुलरिहा क्षेत्र में किराए के मकान में रहती है और एक होटल में शेफ के रूप में काम करती है। इसके साथ ही वह यूट्यूब, इंस्टाग्राम और अन्य सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर वीडियो भी पोस्ट करती रहती है।
लाइव सुसाइड की सूचना पर पहुंची पुलिस
शुक्रवार दोपहर करीब 1 बजे मेटा की ओर से पुलिस को सूचना मिली कि एक युवती सोशल मीडिया पर लाइव आकर सुसाइड करने की कोशिश कर रही है। वीडियो में वह दवा दिखाकर उसे खाते हुए और पानी पीते हुए नजर आ रही थी। पोस्ट के शब्दों और भावनात्मक गाने को देखते हुए इसे गंभीर मामला मानते हुए तत्काल कार्रवाई की गई।
लोकेशन ट्रेस होने के बाद हल्का दरोगा राहुल कुमार और कॉन्स्टेबल संदीप यादव युवती के कमरे तक पहुंचे और स्थिति को संभाला।
यूपी पुलिस और मेटा का करार
उत्तर प्रदेश में आत्महत्या की घटनाओं को रोकने के लिए यूपी पुलिस और मेटा के बीच विशेष करार है। इस तकनीकी सहयोग के तहत अब तक कई लोगों की जान बचाई जा चुकी है।
लोकल भाषा में भी खतरे को पहचानता है AI
मेटा का AI सिस्टम सिर्फ अंग्रेज़ी ही नहीं, बल्कि हिंदी और अन्य लोकल भाषाओं में लिखी गई पोस्ट, कैप्शन, वीडियो और मैसेज को भी डिटेक्ट करता है। जैसे ही किसी पोस्ट में तनाव, आत्महत्या की मंशा या खुद को नुकसान पहुंचाने के संकेत मिलते हैं, उसे रेड फ्लैग के रूप में चिह्नित किया जाता है।
ऐसे काम करता है मेटा का सिस्टम, सिलसिलेवार समझें
पहला तरीका – रिपोर्ट के जरिए
अगर कोई यूजर फेसबुक या इंस्टाग्राम पर दुख, तनाव या सुसाइड से जुड़ी पोस्ट करता है और कोई दूसरा यूजर उसे रिपोर्ट कर देता है, तो मेटा की कम्युनिटी ऑपरेशन टीम उस पोस्ट की समीक्षा करती है। सुसाइड टेंडेंसी मिलने पर लोकल अथॉरिटी यानी पुलिस को सूचना दी जाती है।
दूसरा तरीका – AI की स्वतः पहचान
अगर कोई पोस्ट रिपोर्ट नहीं भी की जाती, तब भी मेटा का AI एल्गोरिदम लगातार कंटेंट स्कैन करता रहता है। संदिग्ध पोस्ट मिलने पर यूजर की उपलब्ध जानकारी—जैसे नाम, ईमेल, मोबाइल नंबर और आईपी एड्रेस—की मदद से लोकेशन ट्रेस कर पुलिस कंट्रोल रूम को सूचना भेजी जाती है।
इसके बाद स्थानीय पुलिस मौके पर पहुंचकर संबंधित व्यक्ति से संपर्क करती है और जरूरत पड़ने पर मदद मुहैया कराती है।
पुलिस की अपील
गोरखपुर पुलिस ने लोगों से अपील की है कि सोशल मीडिया पर सुसाइड या गंभीर भावनात्मक कंटेंट को मजाक या प्रैंक के रूप में पोस्ट न करें। ऐसा करना न सिर्फ लोगों को डराता है, बल्कि कानूनन कार्रवाई का कारण भी बन सकता है।
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