जागृत भारत | नई दिल्ली(New Delhi): कम्युनिस्ट पार्टी ऑफ इंडिया (मार्क्सवादी) ने सोमवार, 5 जनवरी 2026 को वेनेजुएला में अमेरिका की सैन्य कार्रवाई को लेकर भारत सरकार के बयान की कड़ी आलोचना की। पार्टी ने कहा कि यह रुख देशों की संप्रभुता की रक्षा की भारत की लंबे समय से चली आ रही परंपरा के अनुरूप नहीं है और इसे “अनुचित” बताया।
संयुक्त राष्ट्र चार्टर के उल्लंघन का जिक्र नहीं
सीपीआई(एम) ने अपने आधिकारिक बयान में कहा कि भारत के बयान में संयुक्त राष्ट्र चार्टर और अंतरराष्ट्रीय कानून के “घोर उल्लंघन” की निंदा तक नहीं की गई। पार्टी के अनुसार, यह बेहद चिंताजनक है, खासकर तब जब अमेरिका के कुछ यूरोपीय सहयोगी देशों ने भी इस कार्रवाई की आलोचना की है।
मोदी सरकार पर गंभीर आरोप
पार्टी ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व वाली भाजपा सरकार की प्रतिक्रिया वेनेजुएला के खिलाफ की गई “खुली आक्रामकता” और वहां के राष्ट्रपति तथा उनकी पत्नी के कथित अपहरण जैसे गंभीर मामले में कमजोर और शर्मनाक है। सीपीआई(एम) ने इसे भारत की स्वतंत्रता और संप्रभुता के समर्थन की ऐतिहासिक नीति के खिलाफ बताया।
विदेश मंत्रालय के बयान पर सवाल
सीपीआई(एम) ने कहा कि विदेश मंत्रालय के बयान में केवल वेनेजुएला की स्थिति पर “गहरी चिंता” जताई गई और क्षेत्र में शांति एवं स्थिरता के लिए संवाद की अपील की गई। पार्टी के अनुसार, इस बयान में अमेरिका की कार्रवाई की कोई स्पष्ट निंदा नहीं की गई, जो अंतरराष्ट्रीय कानून का खुला उल्लंघन है।
ब्रिक्स देशों के रुख से तुलना
वामपंथी दल ने भारत के रुख की तुलना ब्रिक्स साझेदार देशों ब्राजील और दक्षिण अफ्रीका से की। पार्टी ने कहा कि इन दोनों देशों ने अमेरिका की कार्रवाई की स्पष्ट रूप से निंदा की और वेनेजुएला के राष्ट्रपति निकोलस मादुरो तथा उनकी पत्नी की रिहाई की मांग की, जबकि भारत का रुख इसके विपरीत रहा।
अमेरिका समर्थक नीति का आरोप
सीपीआई(एम) ने आरोप लगाया कि भारत का यह रुख मोदी सरकार की दक्षिणपंथी विचारधारा और ट्रंप प्रशासन के साथ उसकी रणनीतिक निकटता को दर्शाता है। पार्टी ने कहा कि इस रुख के जरिए भारत ने ग्लोबल साउथ के हितों का प्रतिनिधित्व करने का दावा भी छोड़ दिया है।
मोदी सरकार से मांग
पार्टी ने मांग की कि मोदी सरकार इस “अपमानजनक” स्थिति को त्यागे और वेनेजुएला में अमेरिका की आक्रामक और अवैध कार्रवाइयों के खिलाफ स्पष्ट और सशक्त रुख अपनाए।
भारत का आधिकारिक पक्ष
भारत ने रविवार, 4 जनवरी 2026 को वेनेजुएला के राष्ट्रपति निकोलस मादुरो और उनकी पत्नी सिलीया फ्लोरेस को अमेरिकी सैन्य अभियान में हिरासत में लिए जाने पर “गहरी चिंता” व्यक्त की थी। नई दिल्ली ने कहा कि वह तेल समृद्ध दक्षिण अमेरिकी देश में विकसित हो रही स्थिति पर करीबी नजर बनाए हुए है।
अमेरिकी कार्रवाई और मौजूदा हालात
शनिवार तड़के, 3 जनवरी 2026 को वेनेजुएला की राजधानी कराकस में हुई इस अभूतपूर्व कार्रवाई के बाद अमेरिका राष्ट्रपति मादुरो और उनकी पत्नी को न्यूयॉर्क ले गया, जहां उन पर ड्रग तस्करी से जुड़े आरोपों में मुकदमा चलाया जाना है। वहीं, अमेरिका की इस कार्रवाई की निंदा करते हुए वेनेजुएला ने देश में राष्ट्रीय आपातकाल की घोषणा कर दी है।
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