जागृत भारत | अध्यात्म व राशिफल : नए साल 2026 में श्रद्धालुओं के लिए एक अत्यंत शुभ और दुर्लभ धार्मिक संयोग बनने जा रहा है। विक्रम संवत 2083 में ज्येष्ठ अधिकमास (पुरुषोत्तम मास) पड़ने के कारण वर्ष 2026 में सामान्य 12 के बजाय 13 पूर्णिमा होंगी। यह संयोग भगवान विष्णु, मां लक्ष्मी और चंद्रदेव की आराधना के लिए विशेष फलदायी माना जा रहा है।
पूर्णिमा का धार्मिक महत्व
हिंदू धर्म में पूर्णिमा को अत्यंत पावन तिथि माना गया है। इस दिन व्रत, स्नान, दान-पुण्य, जप-तप, ध्यान और सत्संग का विशेष महत्व होता है। मान्यता है कि पूर्णिमा पर किए गए धार्मिक कर्म कई गुना फल प्रदान करते हैं। आमतौर पर हर वर्ष 12 पूर्णिमा होती हैं, लेकिन अधिमास पड़ने वाले वर्षों में यह संख्या 13 हो जाती है।
ज्येष्ठ अधिकमास से बना विशेष संयोग
ज्योतिषाचार्य पंडित नवनीत शर्मा के अनुसार, विक्रम संवत 2083 में ज्येष्ठ अधिकमास पड़ रहा है, जिसे पुरुषोत्तम मास भी कहा जाता है। यह मास भगवान विष्णु को समर्पित होता है। इसी कारण वर्ष 2026 में एक अतिरिक्त पूर्णिमा जुड़ रही है, जिससे यह वर्ष आध्यात्मिक दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण बन गया है।
विष्णु-लक्ष्मी और चंद्र पूजा का बढ़ेगा महत्व
पूर्णिमा के दिन मां लक्ष्मी, भगवान विष्णु और चंद्रमा की पूजा का विशेष विधान है। माना जाता है कि इस वर्ष 13 पूर्णिमा होने से साल भर धन, वैभव, सुख-समृद्धि और मनोकामना पूर्ति के अवसर बढ़ेंगे। खासकर ज्येष्ठ अधिक पूर्णिमा का धार्मिक महत्व अत्यधिक रहेगा।
2026 की प्रमुख पूर्णिमा तिथियां
पौष पूर्णिमा – 3 जनवरी (शनिवार)
माघ पूर्णिमा – 1 फरवरी (रविवार)
फाल्गुन पूर्णिमा – 3 मार्च (मंगलवार)
चैत्र पूर्णिमा – 1 अप्रैल (व्रत) / 2 अप्रैल (स्नान-दान)
वैशाख पूर्णिमा – 1 मई (शुक्रवार)
ज्येष्ठ अधिक पूर्णिमा (पुरुषोत्तम मास) – 30 मई (शनिवार)
ज्येष्ठ पूर्णिमा – 29 जून (सोमवार)
आषाढ़ पूर्णिमा – 29 जुलाई (बुधवार)
श्रावण पूर्णिमा – 27 अगस्त (व्रत) / 28 अगस्त (स्नान-दान)
भाद्रपद पूर्णिमा – 26 सितंबर (शनिवार)
शरद पूर्णिमा – 25 अक्टूबर (व्रत) / 26 अक्टूबर (स्नान-दान)
कार्तिक पूर्णिमा – 24 नवंबर (मंगलवार)
मार्गशीर्ष पूर्णिमा – 23 दिसंबर (बुधवार)
क्यों माना जा रहा है यह संयोग खास
अधिकमास का प्रभाव: लगभग हर 32 महीने में अधिकमास आता है, जिससे उस वर्ष 13 पूर्णिमा होती हैं।
पुरुषोत्तम मास: यह मास भगवान विष्णु को समर्पित होता है, इसमें किए गए पुण्य कर्म विशेष फल देते हैं।
धार्मिक अवसरों में वृद्धि: पूरे वर्ष व्रत, दान और साधना के लिए अधिक शुभ तिथियां मिलेंगी।
लक्ष्मी-विष्णु कृपा: 13 पूर्णिमा होने से धन, समृद्धि और सौभाग्य की प्राप्ति का विशेष योग बनेगा।
ज्योतिषाचार्य की राय
ज्योतिषाचार्य पंडित नवनीत शर्मा का कहना है कि वर्ष 2026 में बनने वाला यह अधिकमास का संयोग अत्यंत दुर्लभ और पावन है। पुरुषोत्तम मास को भक्ति, तप और साधना के लिए श्रेष्ठ माना गया है। इस मास में व्रत, जप और धार्मिक नियमों का पालन करने से विशेष पुण्य फल की प्राप्ति होती है।
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