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बीट पुलिसिंग ने बदली गाजियाबाद की सुरक्षा तस्वीर: 2.64 लाख नागरिक बने पुलिस की डिजिटल आंख

Published on: December 29, 2025
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जागृत भारत | गाजियाबाद(Ghaziabad): जिले की पुलिस ने साल 2025 में सुरक्षा व्यवस्था को एक नई दिशा देते हुए इसे सिर्फ कानून-व्यवस्था तक सीमित न रखकर जनभागीदारी का मजबूत मॉडल बना दिया है। अप्रैल 2025 से लागू की गई बीट पुलिसिंग प्रणाली के तहत पुलिस और आम नागरिकों के बीच सीधा संवाद स्थापित हुआ है, जिससे अपराध नियंत्रण और जागरूकता अभियानों को नई गति मिली है।

2131 बीटों में बंटा पूरा जनपद

गाजियाबाद पुलिस कमिश्नरेट में 24 अप्रैल को पुलिस आयुक्त जे. रविंदर गौड ने बीट पुलिसिंग प्रणाली की औपचारिक शुरुआत की थी। यह कमिश्नरेट बनने के बाद पहली बड़ी संरचनात्मक पुलिसिंग पहल मानी जा रही है।
इस योजना के तहत पूरे जनपद को 2131 बीटों में विभाजित किया गया है। इनमें नगर जोन में 640, ट्रांस हिंडन जोन में 693 और ग्रामीण जोन में 798 बीट शामिल हैं।

बीटवार तैनाती से बढ़ी निगरानी और गश्त

जमीनी स्तर पर निगरानी और त्वरित कार्रवाई के लिए 941 बीट सब इंस्पेक्टर और 1431 बीट पुलिस अधिकारी तैनात किए गए हैं। बीटवार जिम्मेदारी तय होने के बाद पुलिस गश्त की संख्या बढ़ी है, सूचनाएं तेजी से मिलने लगी हैं और पुलिस की प्रतिक्रिया पहले से अधिक समयबद्ध और प्रभावी हुई है।

वॉट्सएप ग्रुप बने संवाद का मजबूत जरिया

बीट पुलिसिंग को सामुदायिक स्तर पर मजबूत करने के लिए बीट अधिकारियों ने वॉट्सएप जनसंवाद ग्रुप तैयार किए। इन ग्रुपों से अब तक 2.64 लाख नागरिक जुड़ चुके हैं।
इनमें स्थानीय निवासी, व्यापारी, स्कूल-कॉलेज प्रतिनिधि और समाज के गणमान्य लोग शामिल हैं। इनके माध्यम से सुझाव, शिकायतें और सुरक्षा से जुड़ी सूचनाएं सीधे पुलिस तक पहुंच रही हैं।

बीट स्तर पर सामने आए ठोस परिणाम

बीट पुलिसिंग के तहत कई उल्लेखनीय कार्य सामने आए हैं।
क्रॉसिंग रिपब्लिक थाना क्षेत्र की बीट-9 में तैनात मुख्य आरक्षी अमित कुमार ने व्यापारियों के सहयोग से 32 आधुनिक सीसीटीवी कैमरे लगवाए और थाने को उनका लाइव एक्सेस दिलाया।

अंकुर विहार थाना क्षेत्र में मुख्य आरक्षी मनोज कुमार ने 22 अपराधियों का सत्यापन कराया, जिनमें छह पर गुंडा अधिनियम और 15 पर बीएनएसएस की धारा 129 के तहत कार्रवाई हुई।
वहीं, इंदिरापुरम में मुख्य आरक्षी रमन मलिक ने 55 साइबर जागरूकता कार्यक्रम आयोजित कर छात्रों और नागरिकों को साइबर अपराधों के प्रति सतर्क किया।

सत्यापन सेवाओं में आई पारदर्शिता

बीट पुलिस प्रणाली के जरिए किरायेदार, चरित्र, कर्मचारी और पासपोर्ट सत्यापन जैसी सेवाएं अब सीधे संबंधित बीट अधिकारी द्वारा तय समय में और पारदर्शी तरीके से पूरी की जा रही हैं। इससे आम जनता का भरोसा पुलिस पर और मजबूत हुआ है।

पुलिस आयुक्त का बयान

पुलिस आयुक्त जे. रविंदर गौड ने कहा कि बीट पुलिसिंग न केवल पुलिस की रीढ़ है, बल्कि जनता के साथ सीधा संवाद स्थापित करने का सबसे प्रभावी माध्यम भी बन चुकी है। यह व्यवस्था कानून-व्यवस्था को और अधिक मजबूत करने में अहम भूमिका निभा रही है।

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