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बहराइच में इंसानियत शर्मसार: मासूमों पर बार-बार दरिंदगी करने वाला दोषी, चौथी बार उम्रकैद से अदालत का सख्त संदेश

Published on: December 19, 2025
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जागृत भारत | बहराइच(Bahraich): उत्तर प्रदेश के बहराइच जिले से सामने आया मामला न सिर्फ कानून बल्कि समाज के लिए भी गंभीर चेतावनी है। एक ही आरोपी द्वारा बार-बार मासूम बच्चियों के साथ दुष्कर्म जैसे जघन्य अपराध किए जाने के बाद अदालत ने बेहद कड़ा रुख अपनाया है। विशेष पॉक्सो अदालत ने दोषी को चौथी बार आजीवन कारावास की सजा सुनाकर साफ कर दिया कि बच्चों के खिलाफ अपराध करने वालों के लिए कोई रियायत नहीं है।

पांच साल की बच्ची से दरिंदगी का मामला

बहराइच के सुजौली गांव निवासी अविनाश पांडेय उर्फ सिप्पल को पांच वर्ष की बच्ची के साथ दुष्कर्म का दोषी पाया गया। बुधवार को विशेष न्यायाधीश पॉक्सो अरविंद कुमार गौतम की अदालत ने आरोपी को आजीवन कारावास की सजा सुनाई। इसके साथ ही उस पर 2 लाख 40 हजार रुपये का आर्थिक दंड भी लगाया गया।

रात में बच्ची के लापता होने से शुरू हुई जांच

पीड़िता की मां ने तीन जुलाई 2025 को सुजौली थाने में शिकायत दर्ज कराई थी। उन्होंने बताया कि दो जुलाई की रात अचानक नींद खुलने पर उनकी सबसे छोटी बेटी घर में नहीं मिली। परिजनों द्वारा तलाश के बाद भी जब बच्ची का कोई सुराग नहीं मिला, तब पुलिस को सूचना दी गई। मामले की गंभीरता को देखते हुए पुलिस ने पॉक्सो एक्ट के तहत मुकदमा दर्ज कर जांच शुरू की।

जांच में सामने आया सीरियल अपराधी

पुलिस जांच में सामने आया कि इस अपराध में शामिल व्यक्ति कोई नया आरोपी नहीं, बल्कि पहले से सजायाफ्ता है। अविनाश पांडेय इससे पहले भी मासूम बच्चियों के साथ दुष्कर्म के तीन मामलों में दोषी ठहराया जा चुका है। विवेचना पूरी होने के बाद पुलिस ने चार्जशीट कोर्ट में दाखिल की।

अदालत की टिप्पणी: समाज के लिए खतरनाक प्रवृत्ति

अभियोजन पक्ष ने अदालत में दलील दी कि आरोपी की प्रवृत्ति सुधार योग्य नहीं है और वह समाज के लिए स्थायी खतरा बन चुका है। कोर्ट ने इस तर्क से सहमति जताते हुए कहा कि बार-बार इस तरह के अपराध करना उसकी मानसिकता को दर्शाता है, इसलिए कठोरतम सजा जरूरी है।

लगातार चौथी बार उम्रकैद

अविनाश पांडेय को इससे पहले भी तीन अलग-अलग मामलों में आजीवन कारावास की सजा मिल चुकी है। यह चौथी बार है जब अदालत ने उसे उम्रभर जेल में रखने का फैसला सुनाया है। कोर्ट के अनुसार अब आरोपी के खिलाफ कोई अन्य मामला लंबित नहीं है।

अब तक कब-कब मिली सजा

24 सितंबर 2025 को आजीवन कारावास और 1 लाख 60 हजार रुपये जुर्माना
29 सितंबर 2025 को आजीवन कारावास और 2 लाख रुपये से अधिक का जुर्माना
8 अक्तूबर 2025 को आजीवन कारावास और 2 लाख 40 हजार रुपये जुर्माना
17 दिसंबर 2025 को आजीवन कारावास और 2 लाख 60 हजार रुपये जुर्माना

न्यायपालिका का कड़ा संदेश

अदालत के इस फैसले को बच्चों के खिलाफ अपराधों पर सख्त चेतावनी के रूप में देखा जा रहा है। न्यायपालिका ने स्पष्ट कर दिया है कि मासूमों के भविष्य से खिलवाड़ करने वालों को कानून किसी भी सूरत में बख्शने वाला नहीं है।

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