जागृत भारत | लखनऊ(Lucknow): उत्तर प्रदेश सरकार अब सड़क हादसों में होने वाली मौतों को आधा करने की ठान चुकी है। इसी लक्ष्य को ध्यान में रखते हुए राज्य सरकार ने 181.55 करोड़ रुपये की सड़क सुरक्षा परियोजनाओं को मंजूरी दे दी है। इस बजट से पूरे प्रदेश में तकनीकी मजबूती, कड़े प्रवर्तन और जागरूकता अभियानों में बड़ा बदलाव देखने को मिलेगा।
फरवरी 2026 में चलेगा मेगा रोड सेफ्टी अभियान
प्रदेश में एक बड़े स्तर पर सड़क सुरक्षा मेगा अभियान चलेगा, जिस पर 3 करोड़ रुपये खर्च होंगे। इसके तहत पूरे प्रदेश में —
रोड सेफ्टी जागरूकता रैलियां
वर्कशॉप और पब्लिक आउटरीच इवेंट आयोजित किए जाएंगे।
स्कूल-कॉलेजों में रोड सेफ्टी क्लब होंगे मजबूत
छात्रों को सुरक्षित यातायात की शिक्षा देने के लिए —
रोड सेफ्टी क्लबों पर 225 लाख रुपये
प्रतियोगिताओं व पुरस्कार समारोहों पर 191.91 लाख रुपये
खर्च किए जाएंगे, ताकि नई पीढ़ी को ट्रैफिक नियमों की सही समझ मिल सके।
सभी 75 जिलों में जागरूकता और सुधार कार्य तेज
सड़क सुरक्षा सप्ताह/पखवाड़ा कार्यक्रमों हेतु 244 लाख रुपये
ज़रूरी सड़क सुधार कार्यों के लिए 225 लाख रुपये
सड़क सुरक्षा मित्र योजना को 28 जिलों में मजबूत करने हेतु 14 लाख रुपये स्वीकृत
यूपी रोडवेज बसों में भी जागरूकता संदेश
रोड़वेज बसों में संदेश प्रचार पर 100 लाख रुपये
व्हाट्सएप-मेटा द्वारा ई-चालान/अवेयरनेस अलर्ट के लिए 50 लाख रुपये
9 जिलों में डिटेंशन यार्ड, बलिया में CCTV
9 जिलों में वाहनों के डिटेंशन यार्ड निर्माण हेतु 1,200.76 लाख रुपये
बलिया शहर के प्रमुख चौराहों पर CCTV के लिए 202.98 लाख रुपये
वरिष्ठ अधिकारियों की मौजूदगी में हुई बैठक में इन सभी प्रस्तावों को मंजूरी दी गई।
25 हाई-रिस्क जिलों में ई-एनफोर्समेंट से हादसे कम करने की तैयारी
जिन 25 जिलों में सड़क दुर्घटनाओं में ज्यादा मौतें दर्ज हुईं, वहां विशेष निगरानी पर जोर दिया जाएगा प्रत्येक जिले को 100 लाख रुपये शेष 50 जिलों को 50 लाख रुपये मिलेंगे।
इन जिलों में —
ई-चालान
डिजिटल ट्रैफिक मॉनिटरिंग
स्पीड चेक डिवाइसेस
ऑटोमैटिक प्रवर्तन सिस्टम
स्थापित होंगे।
हाई-टेक प्रवर्तन उपकरणों पर बड़ी खरीद
18 इंटरसेप्टर वाहन — 576 लाख रुपये
106 हाई-टेक टैबलेट — 53 लाख रुपये
आयरन बैरियर, हेलमेट, फ्लोरोसेंट जैकेट, ब्रेथ एनालाइज़र, स्पीड गन आदि की बड़ी खरीद
इन सभी प्रयासों से — तेज़ रफ्तार, गलत ओवरटेकिंग, नशे में ड्राइविंग, बिना हेलमेट/सीटबेल्ट जैसे कारणों से होने वाली दुर्घटनाओं में उल्लेखनीय कमी आने की उम्मीद है।
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