जागृत भारत | लखनऊ(Lucknow): उत्तर प्रदेश में बिजली के निजीकरण के खिलाफ बड़ा मुकाबला खड़ा हो गया है। बिजली कर्मचारियों और किसानों के साझा आह्वान पर 26 नवंबर को पूरे प्रदेश में व्यापक विरोध प्रदर्शन होगा। यह फैसला नेशनल कोऑर्डिनेशन कमेटी ऑफ इलेक्ट्रिसिटी एम्प्लाइज एंड इंजीनियर्स और संयुक्त किसान मोर्चा के राष्ट्रीय नेताओं के बीच बनी सहमति के बाद लिया गया है।
निजीकरण और प्रीपेड मीटर को लेकर बढ़ी नाराजगी
बिजली कर्मचारी संयुक्त संघर्ष समिति के संयोजक शैलेंद्र दुबे के अनुसार, राष्ट्रीय स्तर पर बिजली कर्मचारियों के फेडरेशन और संयुक्त किसान मोर्चा ने मिलकर निजीकरण के खिलाफ संयुक्त राष्ट्रव्यापी आंदोलन चलाने का निर्णय लिया है। कर्मचारियों और किसानों की मुख्य आपत्तियाँ तीन मुद्दों पर केंद्रित हैं:
पूर्वांचल व दक्षिणांचल विद्युत वितरण निगम के निजीकरण का विरोध
इलेक्ट्रिसिटी (अमेंडमेंट) बिल 2025 को वापस लेने की मांग
घरों पर जबरन प्रीपेड स्मार्ट मीटर लगाने का विरोध
प्रदेश के सभी जिलों में होगा बड़ा विरोध प्रदर्शन
केंद्रीय पदाधिकारियों ने बताया कि 26 नवंबर को उत्तर प्रदेश के हर जिले में संयुक्त किसान मोर्चा के बैनर तले प्रदर्शन किया जाएगा। यह आंदोलन न केवल किसानों और उपभोक्ताओं की चिंताओं को सामने लाएगा, बल्कि बिजली कर्मचारियों की भविष्य को लेकर बढ़ती असुरक्षा को भी आवाज देगा।
लखनऊ में परिवर्तन चौक बनेगा विरोध का केंद्र
राजधानी लखनऊ में इस विरोध का केंद्र परिवर्तन चौक रहेगा, जहाँ 26 नवंबर की सुबह 11 बजे से किसान और बिजली कर्मचारी संयुक्त प्रदर्शन करेंगे। बड़ी संख्या में लोगों के जुटने की आशंका के चलते बिजली सेवाओं पर भी असर पड़ सकता है।
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