जागृत भारत | देवरिया(Deoria): बलिया और वाराणसी की यात्रा करने वाले लोगों के लिए भागलपुर पुल कभी जीवनरेखा हुआ करता था। लेकिन अब यही पुल लोगों की परेशानी का कारण बन गया है। पुल पर भारी वाहनों का आवागमन पिछले दो साल से पूरी तरह बंद है। प्रशासन का कहना है कि पुल की हालत ऐसी नहीं है कि उस पर बड़े वाहन चल सकें — ज़रा सी चूक से पुल को गंभीर क्षति पहुँच सकती है।
स्थानीय लोगों की बढ़ी परेशानी
स्थानीय निवासियों का कहना है कि पुल के बंद होने से यात्रा का समय और दूरी दोनों बढ़ गई हैं। कई लोगों को अब बलिया और देवरिया जाने के लिए वैकल्पिक रास्ते अपनाने पड़ रहे हैं, जिससे ईंधन और समय दोनों की बर्बादी हो रही है। लोगों का स्पष्ट कहना है कि नया पुल बनने में तीन से चार साल लगेंगे, इसलिए मौजूदा पुल की मरम्मत कर भारी वाहनों के लिए आवागमन फिर से शुरू किया जाए।
पुल का इतिहास — 1987 में शुरू, 2001 में उद्घाटन
सरयू नदी पर बने इस ऐतिहासिक पुल का निर्माण वर्ष 1987 में राज्य सेतु निगम द्वारा 2819.44 लाख रुपये की लागत से शुरू किया गया था। दिसंबर 2001 में तत्कालीन मुख्यमंत्री राजनाथ सिंह ने इसका उद्घाटन किया था। उद्घाटन के एक दशक बाद ही पुल के छठे पाये का जॉइंट क्षतिग्रस्त होना शुरू हो गया था।
मरम्मत की खानापूर्ति और लगातार बिगड़ती हालत
हर साल मरम्मत का दावा तो किया गया, लेकिन अधिकतर मरम्मत कार्य औपचारिकता मात्र रह गया। 2020 में मोबाइल ब्रिज इंस्पेक्शन यूनिट मशीन से तकनीकी जांच कराई गई, जिसमें मरम्मत की आवश्यकता बताई गई। इसके बाद 2021 में मुंबई की एक कंपनी को मरम्मत का जिम्मा सौंपा गया। दो साल के मरम्मत कार्य और ट्रायल के बाद जब भारी वाहन गुज़रे तो जॉइंट की दरार फिर बढ़ गई।
आईआईटी इंजीनियरों की जांच और लगातार असफल प्रयास
नवंबर 2022 में मुंबई और दिल्ली आईआईटी के इंजीनियरों ने फिर से निरीक्षण किया और मरम्मत का जिम्मा भोपाल की सनफील्ड कंपनी को सौंपा गया। आठ माह की मरम्मत के बाद ट्रायल के दौरान दरारें फिर उभर आईं, जिसके बाद नवंबर 2023 में पुल के दोनों सिरों पर हाइट गेट बैरियर लगा दिए गए और भारी वाहनों की आवाजाही पूरी तरह रोक दी गई।
दो साल बाद भी मरम्मत कार्य शुरू नहीं
अब दो साल बीत चुके हैं, लेकिन पुल का मरम्मत कार्य शुरू नहीं हो पाया है। लोगों में शासन और प्रशासन के प्रति नाराजगी बढ़ती जा रही है। स्थानीय लोगों — प्रमोद सिंह, नवनाथ यादव, बृजभूषण यादव, अमरेन्द्र सिंह मिंटू, धर्मेन्द्र पांडेय, सुनील पांडेय, चंचल सिंह और राकेश सिंह — ने शासन से जल्द पुल की मरम्मत कराने की मांग की है।
प्रशासन का पक्ष
एसडीएम बरहज बिपिन कुमार द्विवेदी ने कहा कि भारी वाहन चलेंगे तो पुल टूट सकता है, क्योंकि उसकी भार वहन क्षमता बेहद कम हो चुकी है। उन्होंने आश्वासन दिया कि इस विषय पर उच्च अधिकारियों से वार्ता कर उचित कदम उठाए जाएंगे।
भागलपुर पुल अब सिर्फ एक तकनीकी ढांचा नहीं, बल्कि हजारों लोगों की दैनिक जरूरतों का प्रतीक बन चुका है। सरकार और प्रशासन यदि जल्द कार्रवाई नहीं करते हैं, तो यह पुल एक बड़े हादसे का कारण भी बन सकता है। मरम्मत कार्य ही इस समस्या का एकमात्र समाधान है।
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