जागृत भारत | अयोध्या (Ayodhya): इलाज के नाम पर लापरवाही नहीं, बल्कि निर्दयता की एक दिल दहला देने वाली घटना सामने आई है। जिला अस्पताल में एक मरीज को मनोरोगी समझकर उसके हाथ-पांव बांध दिए गए, जिससे उसकी मौत हो गई। परिजन इसे अस्पताल की क्रूरता बता रहे हैं और जिम्मेदार डॉक्टरों पर सख्त कार्रवाई की मांग कर रहे हैं।
मृतक शालिग राम (51), निवासी सराय भनौली, हाई शुगर के मरीज थे। पहले उन्हें श्रीराम अस्पताल अयोध्या धाम में भर्ती किया गया था, लेकिन हालत बिगड़ने पर उन्हें जिला अस्पताल रेफर किया गया। वहां डॉक्टरों ने बिना जांच-पड़ताल के उन्हें मानसिक रोगी मान लिया और एक वार्ड में अलग रखकर हाथ-पांव बांध दिए।
परिजनों के अनुसार, शालिग राम को खाना तो दिया गया, लेकिन बंधे होने के कारण वे खा नहीं सके। भूख-प्यास और लाचारी में उन्होंने दम तोड़ दिया।
अब सवाल यह उठ रहा है कि जिंदगी बचाने की जिम्मेदारी निभाने वाले डॉक्टर ही मौत के कारण क्यों बने?
क्या इस अमानवीय कृत्य के लिए दोषियों पर कार्रवाई होगी या फिर यह मामला भी फाइलों में दबकर रह जाएगा?
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