जागृत भारत |वाराणसी(Varansi): बीएचयू में आईआईटी की छात्रा से सामूहिक दुष्कर्म के मामले में गुरुवार को द्रुतगामी न्यायालय (प्रथम) के न्यायाधीश कुलदीप सिंह की अदालत में सुनवाई हुई। इस दौरान मुख्य गवाह और पीड़िता के साथी जी.वी. रितेश से बचाव पक्ष की जिरह जारी रही।
बचाव पक्ष की दलीलें और अदालत की सतर्कता
अभियुक्त कुणाल पांडेय और सक्षम पटेल के अधिवक्ताओं अजय कुमार सिंह और राजीव रंजन सिंह ने गवाह के पूर्व बयानों को चुनौती देते हुए जिरह की। अदालत ने पूरी कार्यवाही के दौरान प्रक्रिया को सुचारू बनाए रखने के लिए विशेष सतर्कता बरती।
तीसरे आरोपी की ओर से स्थगन याचिका
तीसरे आरोपी आनंद चौहान की ओर से मौजूद अधिवक्ता ने जिरह के लिए दूसरी तारीख तय करने की मांग की, यह कहते हुए कि वरिष्ठ अधिवक्ता प्रदेश बार काउंसिल के चुनाव प्रचार में व्यस्त हैं। अभियोजन गवाह जी.वी. रितेश ने अदालत से अनुरोध किया कि उनका प्लेसमेंट इंटरव्यू नजदीक है, इसलिए जिरह जल्द पूरी की जाए।
अदालत का फैसला: सात नवंबर अंतिम तारीख
अदालत ने रितेश के भविष्य को ध्यान में रखते हुए बचाव पक्ष को एक अंतिम अवसर दिया और सुनवाई को एक दिन के लिए स्थगित किया। साथ ही यह भी स्पष्ट किया कि अब कोई और स्थगन आवेदन स्वीकार नहीं किया जाएगा।
अगली जिरह की तारीख 7 नवंबर निर्धारित की गई है। अभियोजन पक्ष की ओर से एडीजीसी मनोज कुमार गुप्ता उपस्थित रहे।
क्या था पूरा मामला
मामले के अनुसार, 2 नवंबर 2023 की रात बीएचयू परिसर में आईआईटी की छात्रा के साथ तीन युवकों — कुणाल पांडेय, आनंद चौहान और सक्षम पटेल — ने सामूहिक दुष्कर्म किया था। पीड़िता ने तीनों के खिलाफ लंका थाने में मुकदमा दर्ज कराया था।
जांच के दौरान तीनों आरोपितों को पुलिस ने गिरफ्तार किया था, जो फिलहाल जमानत पर जेल से बाहर हैं। मुकदमे के दौरान अभियोजन पक्ष के चश्मदीद गवाह जी.वी. रितेश का बयान 31 जुलाई को दर्ज हुआ था, जिसमें उन्होंने पूरे घटनाक्रम का विस्तृत विवरण अदालत को बताया था।
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