जागृत भारत | लखनऊ(Lucknow): उत्तर प्रदेश सरकार ने अपने उन बिजली उपभोक्ताओं को विशेष राहत देने का निर्णय लिया है, जिन्होंने कनेक्शन लेने के बाद कभी भी बिजली के बिल का भुगतान नहीं किया है। प्रदेश में वर्तमान में चल रही बिजली बिल राहत योजना (One Time Settlement – OTS) में ऐसे उपभोक्ताओं को शामिल करने के लिए नियमों में संशोधन किया गया है, जिन्हें ‘नेवर पेड’ (Never Paid) श्रेणी में रखा गया है। इस कदम से न केवल उपभोक्ताओं को भारी बकाया बिल के बोझ से मुक्ति मिलेगी, बल्कि यह पावर कॉर्पोरेशन के राजस्व में भी सुधार लाने में सहायक होगा। यह योजना उन सभी उपभोक्ताओं के लिए एक सुनहरा अवसर है जो लंबे समय से बिल जमा नहीं कर पाए हैं।
योजना के मुख्य प्रावधान और विशेष छूट
प्रदेश में दिसंबर से बिजली बिल राहत योजना शुरू की गई है, जिसमें कुछ विशिष्ट भार (Load) वाले उपभोक्ताओं को शामिल किया गया है:
घरेलू उपभोक्ता: अधिकतम दो किलोवाट भार वाले।
वाणिज्यिक उपभोक्ता: अधिकतम एक किलोवाट भार वाले।
इस योजना में ‘नेवर पेड’ (कनेक्शन लेने के बाद कभी भुगतान नहीं किए) और ‘लांग अनपेड’ (लंबे समय से भुगतान नहीं करने वाले) दोनों तरह के उपभोक्ताओं को शामिल किया गया है।
मुख्य वित्तीय लाभ:
ब्याज में पूर्ण माफी: इस योजना के तहत, कनेक्शन लेने के बाद बकाया बिल पर लगे ब्याज से पूरी तरह से माफी मिलेगी।
मूलधन में की बचत: इसके साथ ही, उपभोक्ताओं को कुल बकाया मूलधन (Principal Amount) में भी की सीधी छूट दी जाएगी।
‘नेवर पेड’ श्रेणी के उपभोक्ताओं के लिए संशोधन
मूल योजना शुरू होने के बाद यह पता चला कि ‘नेवर पेड’ श्रेणी में तमाम ऐसे उपभोक्ता थे जिन्होंने मार्च तक नेवर पेड रहने के बावजूद, उसके बाद यानी अप्रैल से नवंबर के बीच पहली बार कोई एक किस्त जमा कर दी थी।
शिकायतों पर कार्रवाई: किस्त जमा करने के कारण ऐसे उपभोक्ता मूल ‘नेवर पेड’ श्रेणी से बाहर हो गए थे और उन्हें योजना का लाभ नहीं मिल रहा था। इन उपभोक्ताओं की शिकायतों को देखते हुए, पावर कॉर्पोरेशन ने राहत योजना में संशोधन किया है।
संशोधित नियम: संशोधन के तहत, मार्च तक नेवर पेड रहे जिन उपभोक्ताओं ने अप्रैल से नवंबर के बीच पहली बार भुगतान कर दिया है, उन्हें भी अब योजना का लाभ दिया जाएगा।
पंजीयन की तिथि: इन उपभोक्ताओं का पंजीयन दिसंबर से शुरू होगा। पावर कॉर्पोरेशन के प्रबंध निदेशक पंकज कुमार ने इस संबंध में आदेश जारी कर सभी विद्युत वितरण निगमों के प्रबंध निदेशकों को पंजीयन की व्यवस्था सुनिश्चित करने का निर्देश दिया है।
स्मार्ट प्रीपेड मीटर पर सुप्रीम कोर्ट का आदेश
उपभोक्ता अधिकारों से जुड़ा एक महत्वपूर्ण विकास यह भी है कि अब स्मार्ट प्रीपेड मीटर लगवाना है या नहीं, यह विकल्प उपभोक्ताओं के पास मौजूद है, इसे थोपा नहीं जाएगा।
उपभोक्ता परिषद की मांग: राज्य विद्युत उपभोक्ता परिषद के अध्यक्ष अवधेश कुमार वर्मा ने सोमवार को विद्युत नियामक आयोग के अध्यक्ष अरविंद कुमार और सदस्य संजय कुमार सिंह को दिसंबर में आए सुप्रीम कोर्ट के आदेश की प्रति सौंपी।
अनिवार्यता नहीं, विकल्प: उन्होंने आयोग से स्पष्ट आदेश जारी करने की मांग की कि स्मार्ट प्रीपेड मीटरों को अनिवार्य न मानते हुए विकल्प के रूप में स्पष्ट रूप से आदेश दिया जाए ताकि राज्यभर के उपभोक्ताओं में व्याप्त भ्रम खत्म हो।
कानूनी आधार: यह आदेश सिविल अपील माधव केआरजी बनाम पंजाब स्टेट पावर कॉरपोरेशन लिमिटेड में सुप्रीम कोर्ट द्वारा दिसंबर में दिया गया था। कोर्ट ने स्पष्ट कहा है कि “यदि कोई मौजूदा उपभोक्ता प्रीपेड मीटर को चुनता है, तो लाइसेंसी सुरक्षा जमा की समायोजन द्वारा वापसी करेगा।”
अधिकारों की बहाली: परिषद के अध्यक्ष ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट के इस टिप्पणी से यह स्पष्ट हो गया है कि प्रीपेड मीटर उपभोक्ता की इच्छा पर आधारित ‘विकल्प’ है। ऐसे में नए कनेक्शन पर स्मार्ट प्रीपेड मीटर अनिवार्य करके उपभोक्ताओं से ₹6016 की वसूली करना गलत है और इस पर तत्काल रोक लगाई जानी चाहिए।
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