जागृत भारत | झाँसी(Jhansi): प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना के तहत बुंदेलखंड में सामने आया फर्जीवाड़ा अब और गहराता जा रहा है। ताजा जांच में खुलासा हुआ है कि बुंदेलखंड औद्योगिक विकास प्राधिकरण बीडा की अधिग्रहीत जमीन के दस्तावेजों का इस्तेमाल कर करोड़ों रुपये का बीमा क्लेम हड़प लिया गया। हैरानी की बात यह है कि जिन जमीनों पर दो साल पहले मुआवजा दिया जा चुका था उन्हीं की खतौनियों के आधार पर दोबारा बीमा कराया गया और पैसा निकाल लिया गया।
बीडा की 67 एकड़ जमीन से रचा गया करोड़ों का खेल
जांच में सामने आया है कि जालसाजों ने बीडा की करीब 67 एकड़ भूमि से जुड़ी खतौनियों का इस्तेमाल कर 4.26 करोड़ रुपये का फसल बीमा क्लेम प्राप्त कर लिया। इस पूरे फर्जीवाड़े में 450 से अधिक खतौनियां और करीब 2300 खसरा नंबरों का इस्तेमाल किया गया। इन दस्तावेजों के जरिए ढाई सौ से ज्यादा लोगों के खातों में बीमा राशि ट्रांसफर कर दी गई।
डगरवाह और बाजना गांव बने फर्जीवाड़े का केंद्र
सबसे अधिक मामले बबीना क्षेत्र के डगरवाह और बाजना गांव से सामने आए हैं। डगरवाह गांव में बीडा की 314 फर्जी खतौनियों के सहारे करीब 3.29 करोड़ रुपये का बीमा क्लेम लिया गया। वहीं बाजना गांव में बीडा के नाम दर्ज 444 सरकारी नंबरों को 94 खातों में दर्ज कर 1 करोड़ 26 लाख 74 हजार 928 रुपये हड़प लिए गए। इसके लिए कुल 1312 खसरा नंबरों का प्रयोग किया गया। जांच में यह भी सामने आया कि कई मामलों में जितनी जमीन है उससे लगभग दोगुना क्षेत्र दिखाकर बीमा भर दिया गया।
मुआवजा मिल चुकी जमीन पर दोबारा बीमा
पड़ताल में यह चौंकाने वाला तथ्य सामने आया कि जिन जमीनों पर बीडा पहले ही मुआवजा दे चुका है उन्हीं की खतौनियों का इस्तेमाल बीमा क्लेम के लिए किया गया। जानकारों का कहना है कि सरकारी खतौनियों के इस्तेमाल से शक कम होता है इसी वजह से जालसाजों ने जानबूझकर बीडा की जमीन के दस्तावेजों को चुना।
अन्य अधिग्रहीत गांवों में भी गड़बड़ी की आशंका
डगरवाह और बाजना के अलावा बीडा के अंतर्गत आने वाले बमेर इमलिया बछौनी बैदोरा बसई परासई अमरपुर समेत अन्य अधिग्रहीत गांवों में भी इसी तरह के फर्जीवाड़े की आशंका जताई जा रही है। अभी तक कुल कितनी राशि की बंदरबांट हुई है इसका सही आंकड़ा सामने नहीं आया है। कृषि विभाग की ओर से तहसीलवार जांच जारी है।
सत्यापन प्रक्रिया पर भी उठे सवाल
प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना के तहत भुगतान से पहले लेखपाल और बीमा कंपनी द्वारा मौके पर सत्यापन किया जाता है। खतौनी दस्तावेजों का मिलान करने के बाद ही बीमा राशि किसानों के खातों में भेजी जाती है। इसके बावजूद इतने बड़े पैमाने पर फर्जीवाड़ा सामने आने से सत्यापन करने वाले कर्मचारियों और बीमा कंपनियों की भूमिका पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं।
20 हजार किसानों का भुगतान रोका गया
घोटाले के खुलासे के बाद कृषि विभाग ने तत्काल कार्रवाई करते हुए खरीफ सीजन के तहत 20 हजार किसानों के बीमा भुगतान पर रोक लगा दी है। यह सभी बीमा जनसुविधा केंद्रों के माध्यम से कराए गए थे। जांच में सामने आया है कि लगभग 10 हजार मामले संदिग्ध हैं जिनमें खतौनी के गलत इस्तेमाल की आशंका है।
अधिकारियों का बयान
उपनिदेशक कृषि महेंद्र पाल सिंह ने बताया कि तहसील स्तर पर जांच चल रही है। गड़बड़ी साबित होने पर रिकवरी के साथ प्राथमिकी दर्ज कराई जाएगी। उन्होंने यह भी बताया कि केसीसी धारक 67 हजार किसानों को पहले ही बीमा राशि दी जा चुकी है। जांच पूरी होने के बाद ही शेष किसानों के भुगतान पर निर्णय लिया जाएगा। इस वर्ष खरीफ सीजन में कुल 87 हजार किसानों के नुकसान का आकलन किया गया था।
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