जागृत भारत | अलीगढ़ (Aligarh): भारत में आर्थिक नुकसान पहुँचाने के उद्देश्य से बांग्लादेश के तस्करों का रैकेट सक्रिय है। पिछले दिनों 25 लाख रुपये के नकली नोटों की एक बड़ी खेप भारत पहुंची है, जिसे सप्लायर अब बाजार में खपाने में लगे हुए हैं। देहली गेट पुलिस ने जन सुविधा केंद्र पर एक लाख रुपये ऑनलाइन ट्रांसफर कराने पहुंचे एटा निवासी एक सप्लायर को गिरफ्तार किया है। आरोपी के पास से 500-500 के कुल 434 नकली नोट यानी ₹2.17 लाख बरामद किए गए हैं।
जन सुविधा केंद्र पर पकड़ा गया आरोपी
घटनाक्रम: देहलीगेट क्षेत्र के खैर रोड स्थित ज्योति टेलीकॉम में जन सुविधा केंद्र चलाने वाले दीपक वार्ष्णेय ने बताया कि शुक्रवार रात करीब नौ बजे बुलेट बाइक से दो युवक आए। उन्होंने उत्कर्ष (केंद्र संचालक) से 500-500 रुपये की गड्डियां देकर एक लाख रुपये क्यूआर कोड के माध्यम से मालदा के एक शख्स को ऑनलाइन ट्रांसफर करने को कहा।
शक की सुई:
- उत्कर्ष को नोट छूने पर शक हुआ।
- बारीकी से देखने पर उत्कर्ष और दीपक ने पाया कि महात्मा गांधी का फोटो व सुरक्षा तार असली नोटों की तरह स्पष्ट नहीं थे, और तार का रंग भी नहीं बदल रहा था।
- पहचान: नोट देने वाले व्यक्ति ने अपना नाम जिकरुल हसन, निवासी गणेशपुर बाग, एटा रोड, गंजडुंडवारा (कासगंज) बताया।
फरार साथी: जब जिकरुल को लगा कि केंद्र संचालक को जानकारी हो गई है, तो उसने भागने की कोशिश की। तत्काल पुलिस को सूचना दी गई, और आरोपित को हिरासत में ले लिया गया। उसका एक साथी मौके से फरार होने में सफल रहा।
बांग्लादेश से मालदा होते हुए आई थी खेप
एएसपी प्रथम मयंक पाठक ने बताया कि:
- मालदा कनेक्शन: क्यूआर कोड की छानबीन की गई तो वह मालदा निवासी अब्दुल रहमान से संबंधित था। पुलिस को शक है कि ये नकली नोट पहले बांग्लादेश से मालदा पहुंचे, और वहीं से सप्लायरों को खपाने के लिए मिले।
- तस्करी नेटवर्क: पकड़े गए आरोपित जिकरुल हसन से पूछताछ में पता चला है कि बांग्लादेश से 25 लाख रुपये के नकली नोट भारत आए हैं, और जिकरुल सहित उसके चार-पांच साथी इन्हें बाजार में खपाने में लगे हुए हैं। ये सभी आरोपित अलीगढ़ के आसपास के जिलों के हैं, जिनकी गिरफ्तारी के प्रयास किए जा रहे हैं।
सामान्य व्यक्ति नहीं पहचान सकता नोटों की असलियत
एएसपी ने बताया कि ये नकली नोट इतनी बारीकी से बनाए गए हैं कि सामान्य तरीके से देखने पर बिल्कुल असली प्रतीत होते हैं। कोई भी साधारण व्यक्ति इसे स्वीकार कर लेगा। नकली होने की पहचान केवल बारीकी से देखने पर महात्मा गांधी की फोटो, सुरक्षा तार और कागज की गुणवत्ता को समझने पर ही की जा सकती है।
पुरानी गिरफ्तारी: पकड़े गए आरोपित जिकरुल हसन का आपराधिक रिकॉर्ड भी है। उसे इसी साल मार्च में रोरावर पुलिस ने उसके एक साथी के साथ 70 हजार रुपये के नकली नोटों के साथ गिरफ्तार किया था। जेल से छूटने के बाद वह दोबारा बड़े गिरोह के संपर्क में आ गया था।
पुलिस ने तहरीर के आधार पर मुकदमा पंजीकृत कर आरोपित को जेल भेज दिया है और फरार साथियों की तलाश जारी है।
गोरखपुर में बिजली कर्मियों का महासंग्राम: निजीकरण का टेंडर जारी होते ही सामूहिक ‘जेल भरो’ आंदोलन की चेतावनी
➤ You May Also Like



























































































































































































































































































































































































































































































































































































































































































































































































































































































































































































































































































































