जागृत भारत | प्रयागराज(Prayagraj): उत्तर प्रदेश में संपत्ति की खरीद-बिक्री से जुड़े नियमों में बड़ा बदलाव किया गया है। सोमवार से लागू हुए नए सर्किल रेट के साथ रजिस्ट्री प्रक्रिया को अधिक पारदर्शी और सख्त बनाया गया है। अब संपत्ति की रजिस्ट्री के लिए जियोटैग फोटोग्राफ और प्रॉपर्टी की यूनिक आईडी अनिवार्य कर दी गई है। जियोटैग फोटो में अक्षांश और देशांतर का स्पष्ट रूप से दिखना जरूरी होगा।
जियोटैग फोटो और यूनिक आईडी हुई अनिवार्य
नए नियमों के तहत रजिस्ट्री के समय संपत्ति की जियोटैग फोटो लगाना अनिवार्य होगा, जिससे उसकी सटीक भौगोलिक स्थिति स्पष्ट हो सके। इसके साथ ही हर प्रॉपर्टी की यूनिक आईडी दर्ज की जाएगी। इससे फर्जी रजिस्ट्री, दोहरी बिक्री और गलत लोकेशन दर्शाने जैसी समस्याओं पर अंकुश लगेगा।
रूट मैप और निर्माण वर्ष की भी देनी होगी जानकारी
अब रजिस्ट्री के साथ रूट मैप लगाना भी जरूरी कर दिया गया है। इसके अलावा भवन या फ्लैट के निर्माण का वर्ष बताना अनिवार्य होगा। कॉलोनी बसाने की स्थिति में एनजीटी के नियमों का पालन करना भी आवश्यक होगा। यह सुनिश्चित किया जाएगा कि पर्यावरणीय मानकों की अनदेखी न हो।
सड़कों के हिसाब से तय होंगे अलग-अलग सर्किल रेट
नए सर्किल रेट में सड़कों के प्रकार के अनुसार अलग-अलग दरें तय की गई हैं। राष्ट्रीय राजमार्ग, राज्य मार्ग, जिला मार्ग, संपर्क मार्ग, खड़ंजा मार्ग और इंटरलाकिंग मार्ग पर स्थित संपत्तियों का मूल्यांकन अलग-अलग किया जाएगा। इससे लोकेशन के अनुरूप वास्तविक मूल्य सामने आएगा।
विकासशील गांवों में बढ़े सर्किल रेट
विकासशील गांवों और नगर निगम में शामिल किए गए गांवों का अलग से मूल्यांकन किया गया है। विकासशील गांवों को क, ख, ग और घ चार श्रेणियों में बांटते हुए वहां सर्किल रेट में 25 प्रतिशत तक की बढ़ोतरी की गई है। जिन संपत्तियों में बोरवेल या सबमर्सिबल है, उनके लिए एक लाख रुपये अतिरिक्त मूल्य तय किया गया है। पौधों का मूल्यांकन उनकी आयु के आधार पर होगा।
कार्नर प्लॉट पर लगेगा अतिरिक्त स्टांप शुल्क
यदि कोई संपत्ति दो सड़कों के कार्नर पर स्थित है तो रजिस्ट्री के समय 10 प्रतिशत अतिरिक्त स्टांप शुल्क देना होगा। वहीं, यदि संपत्ति दो मार्गों के कार्नर के साथ पार्क के पास है, तो 20 प्रतिशत अतिरिक्त स्टांप शुल्क लगेगा।
वाणिज्यिक संपत्तियों का अलग मूल्यांकन
एआईजी स्टांप राकेश चंद्रा ने बताया कि वाणिज्यिक संपत्तियों का मूल्यांकन भी नए तरीके से किया जाएगा। एकल दुकान या वाणिज्यिक अधिष्ठान की स्थिति में भूमि और निर्माण की दर को जोड़कर मूल्यांकन होगा। वहीं, एक से भिन्न वाणिज्यिक भवन में स्थित दुकानों के लिए कारपेट एरिया की दर के आधार पर गणना की जाएगी।
उदाहरण से समझें नई गणना प्रक्रिया
यदि किसी क्षेत्र में 10 वर्ग मीटर की दुकान के लिए भूमि की दर 30 हजार रुपये प्रति वर्ग मीटर और निर्माण की दर 20 हजार रुपये प्रति वर्ग मीटर है, तो कुल मूल्यांकन पांच लाख रुपये होगा। इसी तरह यदि किसी दुकान का क्षेत्रफल 12 वर्ग मीटर है और कारपेट एरिया दर डेढ़ लाख रुपये प्रति वर्ग मीटर है, तो उसका मूल्यांकन 18 लाख रुपये माना जाएगा।
आवासीय भवनों के हर तल का अलग मूल्यांकन
आवासीय भवनों में अलग-अलग तलों का अलग मूल्यांकन किया जाएगा। दो मंजिला भवन में प्रत्येक मंजिल में भूमि का अविभाजित हिस्सा 50-50 प्रतिशत होगा। तीन मंजिला भवन में यह 33.33 प्रतिशत और चार मंजिला भवन में 25 प्रतिशत होगा। 20 वर्ष या उससे अधिक पुराने भवनों में निर्माण पर कम स्टांप लगेगा, लेकिन जमीन पर मौजूदा दर से स्टांप शुल्क देना होगा।
शहर से सटे 18 गांव घोषित हुए अकृषक
शहर से सटे भगवतपुर ब्लॉक के 18 गांवों की भूमि को अब अकृषक घोषित कर दिया गया है। इन गांवों में कृषि भूमि लगभग समाप्त हो चुकी है, लेकिन राजस्व रिकॉर्ड में अब तक कृषि भूमि दर्शाई जा रही थी। इस बदलाव के बाद इन गांवों में सर्किल रेट करीब 33 प्रतिशत बढ़ गया है, जिससे जमीन की खरीद-फरोख्त महंगी हो जाएगी और सरकार के राजस्व में वृद्धि होगी।
काले धन पर लगेगा अंकुश, बढ़ेगा राजस्व
नए सर्किल रेट और नियमों से संपत्ति लेनदेन में पारदर्शिता बढ़ेगी और काले धन पर अंकुश लगेगा। अधिकारियों का अनुमान है कि इन बदलावों से जिले के राजस्व में लगभग 150 करोड़ रुपये की बढ़ोतरी होगी। साथ ही फ्लैट और अपार्टमेंट के स्पष्ट रेट सामने आने से खरीदारों को बैंक लोन और संपत्ति मूल्यांकन में भी सुविधा मिलेगी।
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