जागृत भारत, देवरिया। धान की फसल के लिए सबसे अहम समय पर देवरिया जिले में यूरिया खाद का गहरा संकट खड़ा हो गया है। गोदामों और दुकानों के बाहर सुबह से शाम तक लाइन लगाने के बावजूद किसानों को खाली हाथ लौटना पड़ रहा है। कई समिति कार्यालयों पर ताले लटक रहे हैं। नतीजा यह है कि हल्की बारिश से बढ़ी नमी के बीच धान की फसल पीली पड़ने लगी है। खास बात यह है कि यह हालात प्रदेश के कृषि मंत्री सूर्य प्रताप शाही के गृह जिले में बने हुए हैं।
गोदामों पर लंबी कतारें, किसानों को मायूसी
खुखुंदू, भलुअनी, बरहज, भाटपाररानी, बैतालपुर, पथरदेवा, रुद्रपुर और रामपुर कारखाना ब्लॉकों में हाल सबसे ज्यादा खराब है। किसान रातभर गोदामों के बाहर इंतजार करते हैं, लेकिन सुबह उन्हें कहा जाता है—“स्टॉक नहीं है।” किसान संगठनों ने चेतावनी दी है कि अगर हालात नहीं सुधरे तो धान की पूरी फसल चौपट हो सकती है।
कालाबाजारी और जमाखोरी के आरोप
ग्रामीणों का आरोप है कि डीलरों और गोदामों की मिलीभगत से यूरिया की कालाबाजारी हो रही है। 266 रुपये की यूरिया 350–400 रुपये में खुलेआम बिक रही है। कई जगह किसानों को तभी खाद मिलती है जब वे साथ में डीएपी या कीटनाशक खरीदें। इसका सबसे ज्यादा असर छोटे और गरीब किसानों पर पड़ रहा है।
प्रशासन की कार्रवाई नाकाफी
यूरिया संकट को देखते हुए प्रशासन ने एसडीएम और कृषि विभाग की संयुक्त टीमें बनाई हैं और गोदामों का निरीक्षण करने का निर्देश दिया है। लेकिन किसानों का कहना है कि यह केवल औपचारिकता बनकर रह गया है। उनका आरोप है कि कार्रवाई के बजाय अधिकारी सिर्फ आश्वासन दे रहे हैं।
किसानों का दर्द
बरहज के किसान रामनरेश यादव का कहना है—“धान की फसल में इस समय यूरिया जरूरी है। अगर अभी खाद नहीं मिली तो महीनों की मेहनत पर पानी फिर जाएगा।” वहीं, खुखुंदू के सुनील गोंड बोले—“सुबह से शाम तक लाइन में खड़े रहते हैं, लेकिन हर बार खाली हाथ लौटना पड़ता है।”
बिहार भेजा जा रहा यूरिया
स्थानीय किसानों ने यह भी आरोप लगाया है कि सीमावर्ती इलाकों से ट्रैक्टर-ट्रॉली और छोटे वाहनों में यूरिया की सप्लाई बिहार भेजी जा रही है। किसानों का कहना है कि अगर कृषि मंत्री के गृह जिले में यह स्थिति है, तो अन्य जिलों में हालात और भी गंभीर हो सकते हैं।
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