जागृत भारत | लखनऊ(Lucknow): उत्तर प्रदेश के माध्यमिक शिक्षकों को शासन स्तर से बड़ी राहत मिलने जा रही है। अब अवकाश के दिन शिक्षकों को जबरन विद्यालय बुलाने की परंपरा पर रोक लगेगी। शासन इस संबंध में स्पष्ट और सख्त दिशा-निर्देश जारी करने की तैयारी कर रहा है, ताकि छुट्टियों में शिक्षकों से अनावश्यक कार्य न कराया जा सके।
डीआईओएस द्वारा छुट्टियों में बुलाने की शिकायतें
प्रदेश के माध्यमिक शिक्षा विभाग के अंतर्गत आने वाले कई विद्यालयों में यह शिकायत सामने आती रही है कि जिला विद्यालय निरीक्षक (डीआईओएस) छुट्टी के दिनों में भी शिक्षकों को विद्यालय बुला लेते हैं। माध्यमिक शिक्षा निदेशक द्वारा पहले भी इस पर रोक लगाने के आदेश जारी किए गए थे, लेकिन जमीनी स्तर पर उनका प्रभावी पालन नहीं हो पाया।
कड़ाके की ठंड में भी बुलाए गए शिक्षक
हाल ही में कड़ाके की ठंड के चलते माध्यमिक विद्यालयों में अवकाश घोषित किया गया था। इसके बावजूद कुछ जिलों में शिक्षकों को छुट्टी के दिन काम के लिए बुलाया गया। कई मामलों में तो विद्यालय खुलने के निर्धारित समय के बाद सूचना देकर शिक्षकों को बुलाया गया, जिससे शिक्षकों में नाराजगी बढ़ी।
शिक्षक संगठनों ने शासन से की शिकायत
छुट्टियों में जबरन बुलाए जाने के मामलों को लेकर शिक्षक संगठनों ने शासन स्तर पर उच्च अधिकारियों से शिकायत दर्ज कराई। साथ ही माध्यमिक शिक्षा निदेशालय को भी इसकी जानकारी दी गई। इन शिकायतों के बाद शासन ने मामले को गंभीरता से लिया है।
निदेशालय ने जताई नाराजगी, जारी होंगे कड़े निर्देश
माध्यमिक शिक्षा निदेशालय ने संबंधित डीआईओएस को पत्र भेजकर नाराजगी जाहिर की है। साथ ही यह स्पष्ट किया गया है कि शासन जल्द ही सख्त निर्देश जारी करेगा। प्रस्तावित व्यवस्था के तहत छुट्टी के दिन किसी भी शिक्षक को ड्यूटी पर बुलाने से पहले संयुक्त शिक्षा निदेशक से अनुमति लेना अनिवार्य होगा।
प्रतिकर अवकाश की मांग
उत्तर प्रदेश माध्यमिक शिक्षक संघ (एकजुट) के प्रदेश महामंत्री राजीव यादव ने कहा है कि यदि किसी अपरिहार्य स्थिति में शिक्षकों से छुट्टियों में काम लिया जाता है, तो उन्हें इसके बदले प्रतिकर अवकाश दिया जाना चाहिए। उन्होंने इसे शिक्षकों के अधिकार और सम्मान से जुड़ा विषय बताया।
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