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40 बार सर्पदंश झेल चुके, मेडिकल कॉलेज में भर्ती: 20 साल में 500 से ज्यादा सांप पकड़ चुके प्रेमचंद्र

Published on: October 20, 2025
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देवरिया के ‘स्नेक मैन’ को 40वीं बार सर्पदंश

  • घटना का विवरण: गौरी बाजार थाना क्षेत्र में **कोबरा** ने 52 वर्षीय प्रेमचंद्र को **40वीं बार** डसा, जिसके बाद उन्हें **देवरिया मेडिकल कॉलेज** में भर्ती कराया गया।
  • बहादुरी: सर्पदंश के बाद भी प्रेमचंद्र ने कोबरा को सावधानी से **प्लास्टिक के डिब्बे में बंद** किया, ताकि वह किसी और को नुकसान न पहुंचाए।
  • रिकॉर्ड: सीरजम गांव निवासी प्रेमचंद्र पिछले 20 वर्षों में **500 से अधिक सांप** पकड़ चुके हैं और उन्हें जंगल में छोड़ देते हैं।
  • चमत्कारिक वापसी: साल 2024 में एक बार उन्हें मृत घोषित कर दिया गया था, लेकिन **चमत्कारिक रूप से होश में आने** के बाद वह ‘मरकर भी जिंदा लौटे’ के नाम से मशहूर हो गए।
  • डॉक्टरों की चेतावनी: मेडिकल कॉलेज के डॉक्टरों ने उन्हें **आराम करने और सांप पकड़ने का काम छोड़ने** की सलाह दी है, क्योंकि बार-बार सर्पदंश से स्थायी असर पड़ सकता है।

40वीं बार सर्पदंश का शिकार

देवरिया जिले के प्रेमचंद्र प्रसाद, जो साहस और निस्वार्थ सेवा की मिसाल बने हैं, उन्हें एक बार फिर सांप ने डस लिया है। इस बार उन्हें एक कोबरा ने काटा, जिसके बाद उन्हें तत्काल देवरिया मेडिकल कॉलेज में भर्ती कराया गया है। आश्चर्यजनक रूप से, यह 40वीं बार है जब प्रेमचंद्र को सर्पदंश हुआ है। फिलहाल डॉक्टरों ने उनकी हालत स्थिर बताई है और उनका इलाज जारी है।


घटना का विवरण और प्रेमचंद्र की निडरता

• यह घटना रविवार सुबह गौरी बाजार थाना क्षेत्र के भगुआ पासवान टोला में हुई थी। ग्रामीण रामभजन पासवान के घर में कोबरा सांप दिखने पर 52 वर्षीय प्रेमचंद्र को बुलाया गया था।

• सांप को पकड़ते समय, जब वह बांस की सीढ़ी पकड़कर छत से नीचे उतर रहे थे, तभी कोबरा ने पलटकर उनके हाथ की उंगली पर डस लिया।

• सर्पदंश से घायल होने के बावजूद, प्रेमचंद्र बिल्कुल नहीं डगमगाए। उन्होंने कोबरा को सावधानी से पकड़ा और उसे प्लास्टिक के डिब्बे में बंद कर दिया ताकि वह किसी और को नुकसान न पहुंचा सके। इसके बाद ग्रामीणों की मदद से उन्हें तुरंत मेडिकल कॉलेज पहुंचाया गया।

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20 साल का जोखिम भरा सफर

• सीरजम गांव निवासी प्रेमचंद्र पिछले 20 वर्षों से बिना किसी आधिकारिक प्रशिक्षण के सांप पकड़ने का कार्य कर रहे हैं।

• उन्होंने अब तक देवरिया, गोरखपुर और कुशीनगर जिलों में 500 से अधिक सांप पकड़े हैं, जिन्हें वह पकड़ने के बाद जंगल में सुरक्षित छोड़ देते हैं।

• प्रेमचंद्र कहते हैं कि उन्हें बचपन से ही सांपों के प्रति जिज्ञासा थी और उन्होंने यह हुनर खुद अभ्यास करके सीखा है। उनके अनुसार, “यह मेरा काम है और किसी की जान बचाना मेरा फ़र्ज़ है।”


मौत को मात देने वाले ‘स्नेक मैन’

• प्रेमचंद्र की कहानी में सबसे चौंकाने वाला पहलू साल 2024 का है, जब एक बेहद जहरीले सांप के काटने पर गोरखपुर मेडिकल कॉलेज में डॉक्टरों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया था।

• परिवारजन जब उन्हें शव वाहन में डालने की तैयारी कर रहे थे, तभी उनके एक साथी ने उनका हाथ हिलते देखा। डॉक्टरों ने तत्काल आपात उपचार शुरू किया और प्रेमचंद्र कुछ घंटों बाद चमत्कारिक रूप से फिर सांस लेने लगे।

• इस घटना के बाद से ही वह इलाके में ‘मरकर भी जिंदा लौटे साँप पकड़ने वाले’ के नाम से मशहूर हो गए हैं। उनके परिवार (पत्नी और दो बच्चे) को हर बार उनके काम के कारण डर में रहना पड़ता है।


डॉक्टरों की सलाह और इलाके में चर्चा

• देवरिया मेडिकल कॉलेज के डॉक्टरों ने चेतावनी दी है कि बार-बार सर्पदंश होने से शरीर पर स्थायी असर पड़ सकता है। उन्होंने प्रेमचंद्र को आराम करने और यह जोखिम भरा काम छोड़ने की सख्त सलाह दी है।

• अपनी हिम्मत और जीवटता के कारण प्रेमचंद्र की कहानी देवरिया से लेकर सोशल मीडिया तक छा गई है, और लोग उन्हें प्यार से “देवरिया का स्नेक मैन” कह रहे हैं।

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